विश्व पुस्तक मेला प्रगति मैदान दिल्ली में हिमाचल के कवियों की धूम

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प्रगति मैदान दिल्ली में शनिवार को विश्व पुस्तक मेले में जिस तरह पाठकों व साहित्य प्रेमियों ने हिमाचल प्रदेश के साहित्यकारों के कविता संग्रहों, नए कवियों की कृतियों में उत्साह दिखाया, उससे स्पष्ट है कि कविता अभी भी सहित्य की प्रमुख विधा के रूप में स्थापित है और नई पीढ़ी में अपने समय के कवियों को पढ़ने और सुनने की उत्सुकता बराबर बनी हुई है।

हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी शिमला द्वारा विश्व पुस्तक मेले के अवसर पर प्रगति मैदान के हाल नंबर दो में लेखक मंच पर लेखक संगोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें दिल्ली तथा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों से शामिल हुए लेखकों ने अपने विचार सांझा किए तथा कवियों ने काव्यपाठ किया।

कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) सेवानिवृत्त कर्नल कुलदीप सिंह बांशटू बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, प्रचार-प्रसार में सदैव अग्रणी रहा है और वर्तमान में नई पीढ़ी को सांस्कृतिक परंपराओं लोक जीवन के साथ जोड़ने की आवश्यकता है ताकि सोशल मीडिया के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं और भाषा तथा लोक साहित्य का भी अच्छा ज्ञान हो सके।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में पुस्तकों को पढ़ना दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में पुस्तकालय स्थापित करना बहुत जरूरी हो गया है ताकि युवाओं में पढ़ने की रूचि अधिक हो सके और उन्हें विभिन्न विषयों का साहित्य पढ़ने का मौका मिल सके उन्होंने कहा कि लिखने के साथ-साथ पढ़ना और अधिक ज्ञान अर्जित करना भी जरूरी है ताकि एक लेखक सही दिशा में समाज को प्रेरणा प्रदान कर सकें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात कवि लीलाधर मंडलोई ने की, उन्होंने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि हिमाचल प्रदेश का साहित्य राष्ट्रीय स्तर पर लंबे अरसे से पढ़ा जा रहा है। हिमाचल के कथाकार, कवि वर्तमान साहित्य में चर्चित है और नई पीढ़ी भी बराबर लिख रही है यह सुखद है। हिमाचल प्रदेश में साहित्य की विभिन्न विधाओं में साहित्य रचा जा रहा है और यह परंपरा निरंतर बनी रहनी चाहिए।

कवि सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि मदन कश्यप ने अपनी कविता का पाठ किया और कहा कि कविता के माध्यम से कवि जन अपनी भावनाओं, विचारों और संवेदनाओं को व्यक्त करते रहे हैं और यह परिपाटी आज भी साहित्य में प्रमुखता से बनी हुई है। लेखक अपनी काव्य रचनाओं के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों की ओर भी ध्यान आकृष्ट कर रहे हैं। इस अवसर पर हिमाचल के प्रख्यात कथाकार एसआर हरनोट, उपन्यासकार राजकुमार राकेश और दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी की प्रोफेसर डॉ स्नेह लता नेगी भी उपस्थित रहे तथा उन्होंने अपनी कविताएं भी पढी।

कार्यक्रम के प्रारंभ में साहित्यकार मदन हिमाचली और हितेन्द्र शर्मा ने मुख्य अतिथि कर्नल कुलदीप सिंह बांशटू का स्वागत एवं सम्मान किया तथा मंचस्थ विद्वानों को हिमाचल अकादमी की ओर से सम्मानित किया गया। पुस्तक लोकार्पण में दीप्ति सारस्वत की पुस्तक एक स्लेटी आसमान, रविता चौहान के काव्य संग्रह सांची, सविता बंटा की पुस्तक पोह की एक रात, संदीप शर्मा की पुस्तक जिन्दगी की लहरें, पोमिला ठाकुर का बुजका, कल्पना गांगटा, विजय राज उपाध्याय की नई प्रकाशित पुस्तकों का मुख्यातिथि कर्नल कुलदीप सिंह बांशटू , अध्यक्ष लीलाधर मांडलोई, मदन कश्यप, एसआर हरनोट राजकुमार राकेश, डॉ स्नेह लता नेगी, डॉ कर्म सिंह के कर कमलों द्वारा लेखक मंच पर लोकार्पण किया गया।

लेखक मंच पर हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों के प्रतिभागी कवियों में अजेय, विवेक भारद्वाज, अशोक, मदन हिमाचली, सतीश धर, दीप्ति सारस्वत, हितेंद्र शर्मा, सविता बंटा, उमा ठाकुर, दक्ष सुरेश शुक्ला, अनंत आलोक, रविता चौहान, शिवा पंचकरण, नैंसी शर्मा, अजय विचलित राहुल देव प्रेमी, प्रियंका भारद्वाज, कल्पना गांगटा, पौमिला ठाकुर, संदीप शर्मा, मामराज शर्मा, दीप राज विश्वास, प्रदीप सैनी, विवेक भारद्वाज आदि कवियों ने भी अपनी रचनाओं को प्रस्तुत किया तथा विद्यानिधि छाबड़ा ने अपनी कहानी के अंश का पाठ किया।

कार्यक्रम के संयोजक सहायक सचिव डॉ. कर्म सिंह ने कहा कि अकादमी विगत कुछ वर्षों से विश्व पुस्तक मेला के अवसर पर लेखक मंच के माध्यम से अपने हिमाचल प्रदेश के रचनाकारों को अपनी रचनाओं की प्रस्तुति के लिए मंच प्रदान कर रही है जिसमें युवा लेखकों को वरिष्ठ तथा सम्मानित लेखकों के समक्ष अपनी रचनाओं के पाठ करने का अवसर प्राप्त होता है और वरिष्ठ लेखकों के सानिध्य में मार्गदर्शन भी प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा पुस्तक मेले में अकादमी प्रकाशनों की प्रदर्शनी एवं विक्रय का भी आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के मुख्यअतिथि, मुख्यमंत्री के ओएसडी सेवानिवृत्त कर्नल कुलदीप सिंह बांशटू ने हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के स्टॉल पर पहुंचकर पुस्तकों का अवलोकन किया और लोक साहित्य पर विस्तृत चर्चा करते हुए अकादमी के प्रयासों और साहित्य कला संवाद कार्यक्रम की प्रशंसा की तथा कला, संस्कृति, भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में कारगर योजनाएं संचालित करने का संकल्प जताया।

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