विश्व की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में शुमार है श्रीखंड महादेव यात्रा

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श्रीखंड महादेव की यात्रा विश्व की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में शुमार है।।

श्रीखंड महादेव यात्रा जहां यात्रियों को रोमांच से भर देती है। वहीं श्रीखंड महादेव के दर्शन के लिए भक्तों को बेहद मुश्किल और जोखिम भरी खड़ी चढ़ाई चलनी पड़ती है।

इस वर्ष 2023 में श्रीखंड महादेव यात्रा 07 जुलाई से 20 जुलाई तक प्रशासन की देख रेख में होगी।

18,570 फीट ऊंचाई पर स्थित श्रीखंड महादेव के दर्शन बहुत ही दुर्गम और दुर्लभ हैं।।

श्रद्धालुओं को संकरे रास्तों में कई बर्फ के ग्लेशियरों को भी पार करना होता है। वहीं ऊंचाई वाले कई ऐसे स्थल हैं, जहां ऑक्सीजन की कमी का श्रद्धालुओं को सामना करना पड़ता है।

पार्वती बाग से आगे कुछ ऐसे क्षेत्र पड़ते हैं, जहां कुछ श्रद्धालुओं को ऑक्सीजन की कमी के चलते भारी दिक्कतें पेश आती हैं।

यदि ऐसी स्थिति में ऐसे श्रद्धालुओं को समय रहते उपचार या वापस नीचे नहीं उतारा जाता है तो श्रद्धालुओं के लिए खतरा बन जाता है।

यात्रा के लिए पांच बेस कैंप
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यात्रा को सुलभ बनाने के लिए पिछले आठ साल से श्रीखंड ट्रस्ट समिति और जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है। एसडीएम निरमंड और श्रीखंड ट्रस्ट समिति के उपाध्यक्ष ने बताया कि 7 जुलाई से शुरू होने जा रही 32 किलोमीटर श्रीखंड महादेव यात्रा को पांच सेक्टरों में बांटा गया है।

इसमें करीब 130 कर्मचारियों सहित रेस्क्यू टीम को तैनात किया गया है।

बेस कैंप 1 सिंघगाड…
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पहले बेस कैंप सिंघगाड में 40 कर्मचारी तैनात होंगे, जिसमें प्रतिदिन सुबह पांच से शाम सात बजे तक श्रद्धालुओं का पंजीकरण किया जाएगा।

शाम चार बजे तक ही श्रद्धालुओं के जत्थे यात्रा के लिए रवाना किए जाएंगे।

शाम 4:00 बजे के बाद किसी भी श्रद्धालु को बेस कैंप सिंघगाड से जाने की अनुमति नहीं होगी।

सिंघगाड में सभी श्रद्धालुओं का मेडिकल चैकअप किया जाएगा।

फिटनेस वाले श्रद्धालुओं को ही यात्रा में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।

बेस कैंप 2 थाचडू
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दूसरे कैम्प में मेडिकल, रेस्क्यू दल, पुलिस, राजस्व, सेक्टर मैजिस्ट्रेट के 20 लोग तैनात रहेंगे। यहां पर आपात सेवाओं के अलावा श्रीखंड जा रहे सभी यात्रियों की जांच की जाएगी। बिना पंजीकरण या चोरी छिपे जा रहे यात्रियों को यहां से वापस भेजा जाएगा।

बेस कैंप 3 कुंनशा
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तीसरे बेस कैंप कुनशा में 20 कर्मचारियों की टीम तैनात की जाएगी। यहां श्रद्धालुओं को रेस्क्यू व्यवस्था, कानून और आपात सेवाएं मिलेगी। इस बेस कैंप में तैनात कर्मचारी मौसम के अनुकूल श्रद्धालुओं को आगे भेजने या रोकने के निर्णय लेने में सक्षम रहेंगे।

बेस कैंप 4 भीमडवारी
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इसी तरह चौथे बेस कैंप भीमडवारी में भी 20 लोग तैनात रहेंगे, जो आपात स्थिति से निपटने में हर समय तैयार रहेंगे। पांचवें बेस कैंप पार्वती बाग में करीब 28 लोगों की टीम होगी।

इसमें रेस्क्यू टीम के 16, पुलिस के चार जवान, राजस्व के तीन और सेक्टर मैजिस्ट्रेट शामिल रहेंगे। पार्वती बाग से ऊपर कोई भी श्रद्धालु दोपहर 12 बजे के बाद यात्रा नहीं कर सकेगा।

उधर एसडीएम मनमोहन सिंह ने बताया कि नैन सरोवर से ऊपर करीब तीन-चार ग्लेशियर बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि खतरनाक रास्तों को दुरुस्त कर दिया गया है, जल्द ऑनलाइन पंजीकरण भी शुरू कर दिया जाएगा।

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