कोटगढ़ में भालुओ के आतंक पर अब कैमरा ट्रैप, फोकस लाईट, इनर्रडर की नजर, डीएफओ कोटगढ़ यशुदीप सिंह का सराहनीय प्रयास

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कोटगढ़

कोटगढ़ वन मण्डल के वन परिक्षेत्र कोटगढ़ के अन्तर्गत पिछले दो महीने से गांव कण्डा,
शावट, दलान और जरोल टिक्कर में भालूओं द्वारा स्थानीय लोगों की नकदी फसलों व
गौशाला में गाय पर आक्रमण की घटनाएं सामने आ रही है। गांव के प्रतिनिधि व स्थानीय
लोंगों द्वारा डीएफओ कोटगढ़ के कार्यालय में भालूओं के आतंक की समस्याओं बारे प्रस्ताव प्रस्तुत
कर अवगत करवाया गया है।


डीएफओ कोटगढ़ यशुदीप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इन परिस्थितियों से बचने के लिए वन विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में वन अधिकारियों व
कर्मचारियों द्वारा स्थानीय प्रतिनिधियों व लोंगों के सहयोग से (उच्च तीव्रता प्रकाश व ध्वनि के
साथ) गश्त की जा रही है। भालूओं की आवाजाही रोकने के लिए विभाग द्वारा आधुनिक पशु
निरोधक उपकरण जैसे कि कैमरा ट्रैप, फोकस लाईट, इनर्रडर जरोल एवं कण्डा गांव में लगाए
गए है। इसके अतिरिक्त इस कार्यालय द्वारा स्थानीय लोगों की भालूओं के आक्रमण द्वारा
गौशाला में मृत माल-मवेशी हेतू संबधित मालिक को निर्धारित राहत राशि मुहैया कराई जा
रही है। इसके अतिरिक्त स्थानिय प्रतिनिधियों व लोंगों को व्यक्तिगत तौर पर सावधानी बरतने
व निवारक उपाय करने संबंधी सुझाव दिए गए है।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण द्वारा काला भालू मानव संघर्ष को कम करने के लिए शमन रणनीतियों
के संबंध में इस वन मण्डल में सर्वेक्षण किया गया है। इसके तहत वन परिक्षेत्र अधिकारी
कोटगढ़ व कुमारसैन को दिशा-निर्देष दिए गए हैं कि गांव-गांव में स्थनीय लोगों के साथ में
जागरूकता अभियान किया जाए, लोगों के माल-मवेशी व नकदी फसलों को भालूओं से होने
वाले नुकसान को बचाने के लिए उचित हत-कण्डे व सावधानी बरती जाए। इस संदर्भ में
संबंधित वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा कार्यवही अम्ल में लाई जा रही है।

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