हिमाचल में 24 सितंबर तक चलेगा बारिश का दौर, धीरे धीरे विदाई लेगा मानसून

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शिमला

हिमाचल में 24 सितंबर तक बारिश का दौर, मौसम विभाग का पूर्वानुमान….

 

अब तक 8649 करोड़ रुपए की चपत, 2476 घरों को भारी नुकसान

 

मौसम विभाग के पूर्व अनुमान के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 24 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहेगा। मौसम विभाग ने मानसून के सितंबर माह तक सामान्य बने रहने की आशंका जताई है। 24 सितंबर के बाद प्रदेश में बारिश नहीं होगी। हालांकि अब सितंबर महीने में बारिश का ज्यादा असर देखने को नहीं मिलेगा। मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पाल ने यह खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि बरसात का क्रम धीमा जरूर पड़ा है, लेकिन बारिश पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। फिलहाल, प्रदेश सरकार को अब तक 8649 करोड़ का नुकसान हुआ है। यह आंकड़े विभागों के माध्यम से आपदा प्रबंधन विभाग के पास पहुंची रिपोर्ट के बाद जुटाए गए है।

इनमें पीडब्ल्यूडी को 2927 करोड़, जल शक्ति विभाग को 2118 करोड़, बिजली बोर्ड को 1740 करोड़, बागबानी विभाग को 173 करोड़, शहरी विकास विभाग को 88 करोड़, कृषि विभाग को 357 करोड़, ग्रामीण विकास विभाग को 369 करोड़, शिक्षा विभाग को 118 करोड़, मत्स्य पालन विभाग को 13 करोड़, स्वास्थ्य विभाग को 44 करोड़ सहित अन्य विभागों को 121 करोड़ से ज्यादा नुकसान हुआ है। प्रदेश भर में अब तक 382 लोगों की मौत हुई है, जबकि 361 गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जबकि 2476 घरों को नुकसान पहुंचा है।

146 मार्गों पर थमे पहिए

सडक़ें बाधित होने की वजह से प्रदेश भर में मंगलवार को 146 रूटों पर बसों की आवाजाही नहीं हो पाई है। परिवहन निगम ने 2897 रूटों को बस सेवा के लिए तय किया था, लेकिन इनमें से 2751 रूटों पर ही बसें चल पाई। बस रूटों के फेल होने से परिवहन निगम को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा है। सबसे ज्यादा 33 बस रूट कुल्लू में बाधित रहे हैं।

युद्धस्तर पर सड़कों को खोलने में जुटी पीडब्ल्यूडी

पीडब्ल्यूडी ने बीते 24 घंटे में 48 सडकों को बहाल किया है। अब पूरे प्रदेश भर में करीब 300 सडक़ें बाधित हैं। विभाग ने आगामी 24 घंटे में 76 और सडक़ों को बहाल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता अजय गुप्ता ने बताया कि बाधित सडक़ों को बहाल करने के लिए युद्ध स्तर पर काम हो रहा है। विभाग ने 776 जेसीबी मशीनें प्रदेश भर में अलग-अलग उपमंडलों में उतारी हैं। इनमें 650 से अधिक जेसीबी निजी ठेकेदारों से किराए पर ली गई हैं, जबकि करीब 100 जेसीबी विभाग की हैं।

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