रेलवे में मिले नौकरी या प्रदेश सरकार प्रदान करे स्थाई रोजगार, दो बच्चियों को रेल की चपेट से बचाने वाला जाबांज युवा ऋतिक अब आर्थिक तंगी से बदहाल

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शिमला

दो बच्चियों को रेल की चपेट से बचाने वाला जाबांज युवा ऋतिक अब आर्थिक तंगी से बदहाल

रेलवे में मिले नौकरी या प्रदेश सरकार प्रदान करे स्थाई रोजगार

लोग उठा रहे मांग, ऋतिक है असली हीरो इसको मिले सम्मानजनक जीवन

 

आप भी मदद करे…..चौपाल के ऋतिक के जज्बे को सलाम, अपना पैर गवा कर सोलन में रेलवे ट्रैक पर दो बच्चियों की बचाई जान, अब पीजीआई में चल रहा इलाज…….और गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले ऋतिक की मदद जरूर करे…

GPay-8628889425 साहिल धांटा ( भाई )

News24 Himachal

 

वैसे तो वो पूरे गाँव का बहुत लाडला था, हो भी क्यों ना पूरे गाँव में किसी को कोई भी काम पड़ता तो वो झटपट किसी भी बताये काम को कर देता, गाँव में क्या बच्चे, क्या बूढ़े, सभी उसे बहुत प्यार और दुलार करते हैं, जमा दो पास करने के बाद उसे लगा कि उसे आगे पढाई करनी चाहिए, लेकिन घर वालों की आर्थिक स्थिति ऐसी ना थी, कि उसे आगे पढाया जा सके,,, लेकिन उसे जिद्द थी की वो आगे पढाई करेगा और जीवन मे आगे बढ़ेगा, उसने तय किया कि गाँव से दूर एक बड़े शहर सोलन जायेगा और वहां कोई पार्ट-टाइम नौकरी करेगा और बाकी समय वो अपनी पढाई जारी रखेगा, और उसने ऐसा किया भी गाँव मे जैसे तैसे कुछ पैसे का जुगाड़ करके वो सोलन आ गया, यहाँ आते ही उसने एक सुरक्षा एजेंसी कंपनी में अपना पंजीकरण करवाया और उस सुरक्षा एजेंसी कंपनी ने उसे शहर के एक बड़े व्यवसाई गोयल मोटर के यहाँ सुरक्षा गार्ड रखवा दिया, तब उसने अपने फ्री समय मे अपनी पढाई शुरू कर दी, बाकि वो पहले से ही बहुत सहयोगी स्वभाव का था, देखने भी बहुत मासूम और सुंदर था, उसे क्या पता था कि उसका यह बर्ताव ही उसके लिए जीवन भर का दंड दे जायेगा, दोस्तों रोज की तरह वो गोयल मोटर से अपनी ड्यूटी पूरी कर अपने कमरे की ओर जा रहा था समय करीबन कोई 8 से साढ़े आठ का रहा होगा,, साथ मे ही थोड़ी दूरी पर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक था, वो अपने कमरे की ओर तेज कदमों से चला जा रहा था, तभी अचानक उसकी नज़र रेल की पटरी पर पड़ी, उसने देखा कि वहां ट्रैक पर 2 छोटी बच्चियाँ चली जा रही थी तभी उसकी नज़र दूसरी तरफ से आती हुई रेल पर पडी, वो तेजी से भागा और तेज गति से चलती रेल उन दोनों के लगभग पास पहुँच ही चुकी थी कि उसने दोनों बच्चियों को बाजू से पकड़ कर ट्रैक के एक तरफ धकेल दिया बच्चियाँ तो दोनों बच गयी, पर वो अभागा रेल कि चपेट मे आ गया, कुछ दूरी तक तो वह ट्रैन आगे फंसा रहा जिससे वह बुरी तरह से घायल हो गया.. और वहीँ बेसुध होकर गिर गया। तब वहीँ कुछ दूरी पर जा रहे लोगों ने यह सब देखा और गंभीर हालत में वो उसे उठा कर सीधा सोलन अस्पताल ले गए गंभीर हालत के चलते पहले उसे शिमला और बाद में शिमला से चण्डीगढ़ रेफर कर दिया गया। वहां, इलाज के दौरान उसकी एक टांग काटनी पड़ी और दूसरी में भी कई फ्रेक्चर होने के कारण सर्जरी करनी पड़ी है, लेकिन इसी बीच मीडिया में उसके इस बहादुरी भरे काम जिसमे उसने 2 बच्चियों की जान बचाई और अपनी जान को सँकट में डाल दिया,, खूब चर्चे हुए, उसे खूब सेल्यूट किए गए, प्रेरणा दायक बोला गया.. कुछ लोगों ने आर्थिक मदद भी की, लेकिन दोस्तो मात्र 24 साल का यह युवा अब अपाहिज हो चुका है और इसके सामने अभी सारा जीवन पड़ा है.., दोस्तों मुझे लगता है कि देश में जो सर्वोच्च बहादुरी का सम्मान मिलता है वो मिले और यह अपना जीवन सम्मान जनक जिए.., जिसके लिए या तो भारतीय रेलवे या फिर हिमाचल प्रदेश सरकार इस युवा को कोई स्थायी नौकरी प्रदान करें, कृपया आप अपनी राय जरूर व्यक्त करें, ताकि यह बहादुर और निर्भीक युवा आगे चल कर, अपने किये इस काम पर खुद फक्र महसूस करता रहे, अन्यथा, आप जानते ही हो,

धन्यवाद,

नाम रितिक गाँव गागना चम्बी चौपाल, जिला शिमला हिमाचल प्रदेश

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