मां माहेश्वरी मंदिर शड़ी मतियाना में बिशु मेला संपन्न, चार देवठियो के देवलुओ ने निभाई देव परंपरा और रस्मे

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माता माहेश्वरी की देवठी शड़ी मतियाना में चार देवठियो के देवलुओ ने निभाई बिशु मेले की रस्म

चिकड़ेश्वर देवता, कनलेश्वर देवता, नाग देवता और डोम देवता के देवलूओ ने की शरकत

 

 

मतियाना

जिला शिमला की जेठी देवठी माता महेश्वरी मंदिर शडी मतियाना में परंपरागत तीन दिवसीय बिशु मेले का विधिवत समापन हुआ। इस बिशु मेले में तहसील ठियोग की चार बड़ी देवठियो के देवलूओ ने भाग लेकर प्राचीन देव परंपराओं का निर्वहन किया। बिशु मेले में पहले दिन चिखडेश्वर देवता चिखड और कनलेश्वर देवता घनौरी के देवलूओ ने और दूसरे दिन डोम देवता गुठान तथा कालू नाग देवता जदून के देवलूओ ने शिरकत की। मेले में विभिन्न देवठियो से आए देवलुओ ने प्राचीन चोल्टू नृत्य पेश कर खूब समां बांधा और रात को नाटियों का दौर भी चलता रहा। बिशु मेले के अंतिम दिन माता महेश्वरी ने अपने गुरु के माध्यम से कार कारिंदो को देव नीति के निर्वहन की नसीहत दी और क्षेत्र वासियों तथा दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं को सुख समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान किया।

इस अवसर पर माता महेश्वरी के देवा नारायण दत्त शर्मा , पुजारी केशव राम शर्मा , ऊदीराम शर्मा, नारायण दत्त, ठगड़े मदन चौहान, नवीन ठाकुर ,राजीव ठाकुर, भंडारी कृष्ण लाल, दुर्गा सिंह ठाकुर, बाहरी देवठियो से आए देव कारदार, कमेटी सदस्य और मतियाना परगना सहित बाहरी क्षेत्र से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

 

बिशु मेला देव परंपरा और इतिहास

 

बिशु मेला प्राचीन देव परंपरा है और ऊपरी शिमला की विभिन्न देवठियो में इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वैशाख मास की संक्रांति से जिला शिमला की विभिन्न देवठियो में बिशु मेले आरंभ होते हैं और अलग-अलग तिथियां में विभिन्न जगहों पर मनाए जाते हैं। जिला शिमला के माता माहेश्वरी मंदिर शडी मतियाना में 27, 28, 29 वैशाख को हर वर्ष बिशु मेले का आयोजन होता है। यह हिमाचल की एकमात्र ऐसी बड़ी देवठी है जहां पर आज भी प्राचीन परंपरा अनुसार क्षेत्र की चार देवठियो के देवलू भाग लेते हैं। बिशु मेले में देवलू देवी देवता देव छड़ियों के साथ आते हैं और परंपरागत देव मिलन की रस्मों को पूरा किया जाता है और देवी देवता अपने गुरु के माध्यम से लोगों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं । यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है जो कि आज भी सुचारू है। देव छड़ियों के साथ उस क्षेत्र के सभी परगणा वासी आते हैं। इसके अलावा देवलुओ द्वारा लोगो के मनोरंजन के लिए प्राचीन चोलटू देव नृत्य का भी आयोजन किया जाता है। कुछ मंदिरो में बिशु मेले और देव मिलन की परंपरा सिमट गई है और कुछ मंदिरो में एक या दो देवठियो के देवलुओ को बुलाकर इसका निर्वहन किया जा रहा है।

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