राज्यों को पचास वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण

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राज्यों को पचास वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण

     श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा कि राज्यों के निमित्त संपूर्ण पचास वर्षीय ऋण को वर्ष 2023-24 के अंदर पूंजीगत व्यय पर खर्च किए जाने हैं। इनमें से अधिकांश ऋण व्यय राज्यों के विवेक पर निर्भर करेंगे, परंतु इस ऋण का एक हिस्सा उनके द्वारा वास्तविक पूंजी व्यय को बढ़ाने की शर्त पर दिया जाएगा। इस परिव्यय के हिस्से निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए भी जोड़े या आबंटित किए जाएंगे। इनमें पुराने सरकारी वाहनों की स्क्रैपिंग, शहरी आयोजना सुधार और कार्रवाइयां, शहरी स्थानीय निकायों में वित्तीय सुधार ताकि उनमें नगरपालिका बांडों के लिए साख बन सके, पुलिस स्टेशनों के ऊपर या उसके भाग के रूप में पुलिसकर्मियों के लिए आवास सुविधा, यूनिटी मॉल का निर्माण, बाल और किशोर पुस्तकालयों और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और केन्द्रीय स्कीमों के पूंजीगत व्यय में राज्य का हिस्सा शामिल हैं।

 

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श्रीमती सीतारमण ने कहा कि उधारियों से इतर कुल प्राप्तियों का संशोधित अनुमान 24.3 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से निवल कर प्राप्तियां 20.9 लाख करोड़ रुपये है। कुल व्यय का संशोधित अनुमान 41.9 लाख करोड़ है, जिसमें से पूंजीगत व्यय लगभग 7.3 लाख करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि राजकोषीय घाटे का संशोधित अनुमान जीडीपी का 6.4 प्रतिशत है, जो बजट अनुमान के अनुरूप है।

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